लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास हो गया जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन है : प्रो. परवेज आलम

ऑल इंडिया कौमी तंजीम के जिला अध्यक्ष सह एनसीपी एसपी के संस्थापक सदस्य एवं बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. परवेज आलम ने वक्फ संशोधन बिल को भारतीय लोकतंत्र के लिए "काला दिन" करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बिल धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करता है और वक्फ संपत्तियों को कमजोर करने का प्रयास है। उनके अनुसार, सरकार का यह कदम वक्फ की परंपरागत संरचना को बदलने और मुस्लिम समुदाय को कमजोर करने की एक साजिश है।

मुख्य बिंदु:

  • गैर-मुस्लिम सदस्य: वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति होगी।
  • मालिकाना हक: अब वक्फ संपत्तियों पर सिविल कोर्ट में भी अपील होगी।
  • वक्फ संपत्ति की शर्त: मस्जिद की भूमि तभी वक्फ मानी जाएगी जब वह पंजीकृत होगी।
  • सरकारी नियंत्रण: वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस में होगा।
  • राजनीतिक विरोध: विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया।


विस्तार में,

बेतिया | ऑल इंडिया कौमी तंजीम के जिला अध्यक्ष सह एनसीपी एस पी के संस्थापक सदस्य बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता प्रो परवेज आलम ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आज लोक सभा में वक्फ संशोधन बिल पास हो गया जो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन है क्योंकि इस बिल द्वारा भारतीय लोकतंत्र की हत्या करते हुए सीधे तौर पर धार्मिक मामलों धार्मिक संस्थाओं पर हमला है जिस प्रकार इस बिल के जरिय वक्फ काउंसिल और बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जाएगा जबकि किसी दूसरे धार्मिक ट्रस्ट संस्थाओं में कानूनी रूप में दूसरे धर्म का व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता.

आज 75% से अधीक वक्फ मस्जिदों, कब्रिस्तानों और दरगाहों की शक्ल में हैं इसके बाद भी यह कहना की यह धार्मिक मामला नहीं है आज इस बिल को पास हो जाने से बहुत सारे वक्फ संपतियों को नुकसान होगा इस बिल में पुराने कानून सेक्शन 40 में रिलीजन टू बिलीव के तहत अगर वक्फ बोर्ड किसी प्रॉपर्टी पर दावा करता है तो उस प्रॉपर्टी का मालिक सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल में ही अपील कर सकता है 

परंतु नए बिल के अनुसार प्रॉपर्टी का मालिक ट्रिब्यूनल के अलावा रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट, या अन्य ऊपरी कोर्ट में अपील कर सकेगा 

पुराने कानून से वक्फ ट्रिब्यूनल का आदेश आखिरी माना जाता है उसे चुनौती नहीं दी जा सकती 

परंतु नए बिल के अनुसार वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है जिससे लड़ाई लंबी चल सकती हैं 

पुराने कानून के अनुसार किसी जमीन पर मस्जिद हो या उसका उपयोग इस्लामिक कामों के लिए होता है वह स्वत वक्फ संपति होती है 

परंतु नए बिल से जब तक किसी ने उस भूमि को मस्जिद के नाम दान निबंधित नहीं किया है तो वह वक्फ संपति नहीं मानी जाएगी वक्फ बोर्ड में महिलाओं और अन्य धर्म के लोगों की नियुक्ति नहीं होती थी परंतु अब वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं और दो अन्य धर्म के सदस्यों की नियुक्ति होगी नए बिल से वक्फ का परंपरागत ढांचा बदल जाएगा वक्फ संपतियों का रजिस्ट्रेशन जिला मजिस्ट्रेट के ऑफिस में किया जाएगा जो पहले वक्फ बोर्ड में होता था जिससे सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और वक्फ बोर्ड का वक्फ संपतियों में दखल कम होगा नए बिल के अनुसार पूर्व में विवादित भूमि वक्फ की भूमि नहीं मानी जाएगी यह कानून उन अतिक्रमणकरियों के लिए क्लीन चिट होगा जिन्होंने वक्फ की संपति पर अतिक्रमण किया हे यह बिल इस्लाम और मुस्लिम विरोधी है वक्फ, गरीबों, के लिए है वक्फ मस्जिदों, मदरसों के लिए है वक्फ दरगाहों संस्थाओं, स्कूलों, कालेजों के लिए है ना कि अदानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों के लिए है जिन लोगों ने वक्फ की भूमियों पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं और उन्हीं लोगों को बचाने के लिए सरकार यह बिल लाई थी जिसका विरोध मेरे पार्टी सहित सभी विपक्षी नेताओं और पार्टी ने किया बिल तो पास होना ही था क्योंकि बहुमत उनके साथ है क्योंकि नीतीश और नायडू, चिराग पासवान जैसे तथाकथित सेकुलर नेता भी बिल के पक्ष में थे और भाजपा के साथ खड़े हैं लेकिन इसका खामियाजा उन्हें आगे भुगतना पड़ेगा हम सभी विपक्षी पार्टी मिलकर इस बिल का विरोध करते रहेंगे और आने वाले आगामी विधान सभा चुनाव में हम सभी मिलकर उन्हें धूल चटाने का काम करेंगे

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