बेतिया: बिहार विधानसभा में भाकपा-माले केंद्रीय कमिटी सदस्य और सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने प्रखंड और पंचायत स्तर के अस्पतालों में खाली पदों पर डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि हाल में बने अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, पैथोलॉजी और दवाइयों की सुविधा नहीं है, जिससे गरीब जनता को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि स्वास्थ्य और शिक्षा को विकास के दायरे में नहीं रखा गया है, जिससे गरीबों की मौत सरकार की लापरवाही से हो रही है।
मुख्य बिंदु:
- विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बिहार विधानसभा में प्रखंड और पंचायत स्तर के अस्पतालों में खाली पदों पर डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की।
- उन्होंने बताया कि हाल ही में बने अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और दवाइयों की कमी से गरीबों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
- सरकार के जातीय और आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 62% से अधिक आबादी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ है।
- बिहार में प्रति 10 हजार की आबादी पर सिर्फ 8 डॉक्टर और 2 नर्स हैं, जबकि WHO मानक के अनुसार यह संख्या 45 होनी चाहिए।
- विधायक ने सरकार पर आरोप लगाया कि 20 वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी स्वास्थ्य और शिक्षा को विकास में शामिल नहीं किया गया, जिससे 80% आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है।
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बेतिया: बिहार विधानसभा में भाकपा-माले केंद्रीय कमिटी सदस्य और सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने प्रखंड और पंचायत स्तर के अस्पतालों में खाली पदों पर डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बने अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, पैथोलॉजी और दवाइयों की सुविधा नहीं है, जिसका सीधा असर गरीबों पर पड़ रहा है।
विधायक ने सरकार के जातीय और आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि 10 हजार रुपये से कम मासिक आय वाले परिवारों की संख्या आधी आबादी से अधिक है। ऐसे में 62% से अधिक आबादी के पास प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज कराने की क्षमता नहीं है, जिससे गरीबों की मौत सरकार की लापरवाही से हो रही है।
विधायक ने कहा कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है। यहां 10 हजार की आबादी पर सिर्फ 8 डॉक्टर और 2 नर्स हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत 10 हजार की आबादी पर 45 डॉक्टर और नर्स होने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों से बिहार में नीतीश कुमार और भाजपा की सरकार विकास का ढोल पीट रही है, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा को उन्होंने अपने विकास के दायरे में शामिल नहीं किया।
विधायक ने कहा कि डॉक्टरों और नर्सों की कमी के कारण बिहार में 80% आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है, जिससे गरीबों के जीवन पर संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने सरकार से तुरंत खाली पदों को भरने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की मांग की है।
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