भगत सिंह का संदेश आज भी प्रासंगिक: फरहान राजा

बेतिया: शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिए 94 साल हो चुके हैं, लेकिन उनका नारा "इंकलाब जिंदाबाद" आज भी बदलाव और न्याय की आवाज बना हुआ है। शहीद पार्क से तीन लालटेन चौक तक मार्च और प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) के जिला अध्यक्ष फरहान राजा ने कहा कि अमर शहीदों का संदेश आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।

मुख्य बिंदु:

  1. युवाओं की एकता जरूरी: संजय मुखिया ने कहा कि देश की आजादी, भाईचारे और लोकतंत्र पर हमले के खिलाफ युवाओं को एकजुट होना होगा।
  2. भगत सिंह का समाजवादी सपना: सुनील कुमार राव ने कहा कि भगत सिंह केवल जोशीले क्रांतिकारी नहीं, बल्कि समाजवादी भारत का सपना देखने वाले दूरदर्शी विचारक थे।
  3. उर्दू भाषा का महत्व: यूपी के भाजपा मुख्यमंत्री द्वारा उर्दू भाषा को हिकारत से देखने पर संजय मुखिया ने कहा कि यह कट्टरता भगत सिंह की प्रासंगिकता को और बढ़ा देती है।
  4. आज भगत सिंह को याद करने की जरूरत: सुनील राव ने कहा कि जब ट्रंप भारत का अपमान कर रहे हैं और मोदी सरकार चुप है, तो ऐसे समय में भगत सिंह की विचारधारा को अपनाना जरूरी है।
  5. फिलिस्तीन मुद्दे पर चुप्पी: नेतन्याहू द्वारा फिलिस्तीनी बच्चों के जनसंहार पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सुनील राव ने कड़ी आलोचना की।
  6. कार्यक्रम में अफाक अहमद, सुरेंद्र चौधरी, गरीब राम, मनु कुमार और योगेंद्र चौधरी सहित कई लोग उपस्थित थे।


विस्तार में,

बेतिया: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर जेल में फांसी दिए 94 साल हो चुके हैं। तब से उन्हें उर्दू में 'शहीद-ए-आज़म' और 'शहीदों के सरताज' के नाम से जाना जाता है। भगत सिंह द्वारा अमर किया गया प्रसिद्ध नारा "इंकलाब जिंदाबाद" आज भी पूरे भारत में बदलाव और न्याय की आवाज़ के रूप में गूंजता है। यही संदेश आज के दौर के लिए भी प्रासंगिक है।

यह बातें शहीद पार्क, बेतिया में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर आयोजित सभा में इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस) के जिला अध्यक्ष फरहान राजा ने तीन लालटेन चौक पर भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरांत कही। इनौस के जिला सचिव संजय मुखिया ने कहा कि नौ दशकों बाद भी जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उर्दू भाषा को हिकारत भरी नजर से देखते हैं और कट्टरता की भाषा बोलते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भगत सिंह आज भी कितने प्रासंगिक और समकालीन हैं। ऐसे में देश की आजादी, भाईचारे और लोकतंत्र पर हो रहे हमलों के खिलाफ युवाओं की एकता की जरूरत है।

माले नेता सुनील कुमार राव ने कहा कि भगत सिंह केवल जोशीले क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि औपनिवेशिक भारत के सबसे परिपक्व और दूरदर्शी विचारकों में से एक थे। उनका और उनके साथियों का बलिदान सिर्फ औपनिवेशिक दासता से मुक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे समाजवादी भारत का सपना लेकर चले थे। उनके लिए "इंकलाब जिंदाबाद" का नारा तभी पूरा होता था जब "साम्राज्यवाद मुर्दाबाद" की आवाज भी बुलंद हो।

आज भगत सिंह को याद करने की जरूरत है, खासकर जब अमेरिका का ट्रंप प्रशासन भारत के हितों को ठेस पहुंचा रहा है और मोदी सरकार इसे उचित ठहरा रही है। जब नेतन्याहू मासूम फिलिस्तीनी बच्चों और उनके माता-पिता का जनसंहार कर रहा है, ट्रंप हर आज़ादी और न्याय की आवाज को कुचल रहा है और मोदी सरकार न केवल चुप है बल्कि इस जनसंहार का समर्थन कर रही है।

कार्यक्रम में अफाक अहमद, सुरेंद्र चौधरी, गरीब राम, मनु कुमार, योगेंद्र चौधरी आदि लोग मौजूद थे।

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