50, 60, 70 के दशक में आये शरणार्थी आज भी शरणार्थी कैम्प में रहने के लिए मजबूर है
मुख्य बिंदु
- विधायक की मांग – भाकपा माले विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने 45 शेष बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों के तत्काल पुनर्वास की मांग की।
- इतिहास– 50, 60, 70 के दशक में लगभग 50,000 बांग्लादेशी शरणार्थी चंपारण आए थे, जिनमें से अधिकांश का पुनर्वास किया गया, लेकिन 45 परिवार अब भी शरणार्थी कैम्प में रह रहे हैं।
- भूमि आवंटन – ग्रामीण पुनर्वास में 4 एकड़ और शहरी पुनर्वास में 1 कट्ठा भूमि दी गई थी, लेकिन ये 45 परिवार अब भी पुनर्वास से वंचित हैं।
- सरकारी अनदेखी – दशकों से ये परिवार बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी सुध नहीं ली।
- विधायक की अपील – बिहार सरकार से मांग की गई कि शेष 45 परिवारों को हजारी कैम्प की 40 एकड़ भूमि पर स्थायी पुनर्वास और भूमि पट्टा दिया जाए।
Bettiah News: बेतिया पश्चिमी करगहिया में स्थित हजारी कैम्प उर्फ शरणार्थी कैम्प जहां 50, 60, 70 के दशक में आये बंगलादेशी शरणार्थियों में से 45 परिवार को आज तक पुर्नवास नहीं किया गया है जो आज भी शरणार्थी कैम्प में रहने के लिए मजबूर है से भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने मुलाकात कर उनकी तकलीफों को जाना समझा और उन 45 परिवारों को बिहार सरकार से तत्काल पुर्नवास करने की मांग किया है.
आगे कहा कि चुकीं 50, 60, 70 के दशक में करीब 50 हजार परिवार बंगला देशी शरणार्थी चम्पारण आये थे. जिन्हें बेतिया पश्चिमी करगहिया में 40 एकड़ जमीन में बना शरणार्थी कैम्प उर्फ हजारी कैम्प में रखा गया था उसमें से 45 परिवार को छोड़ कर जिन्हें ग्रामीण क्षेत्र में पुर्नवास किया गया उन्हें 4 एकड़ और जिन्हें शहरों में पुर्नवास किया गया उन्हें एक कठ्ठा जमीन दिया गया, लेकिन शेष 45 परिवार आज उसी हजारी कैम्प उर्फ शरणार्थी कैम्प में रहने के लिए मजबूर है, जिनके सुध लेने वाला कोई सरकार नहीं है।
भाकपा-माले सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बिहार के डबल इंजन सरकार से मांग किया है कि जिस 40 एकड़ जमीन पर बना हजारी कैम्प उर्फ शरणार्थी कैम्प है उसी जमीन पर उन शरणार्थियों को उस समय शेष रह गयें 45 परिवार को पुर्नवास कर जमीन का पट्टे देने का काम करें।
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