74 छात्र आन्दोलन के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

बेतिया। आज 1974 के छात्र आन्दोलन बेतिया में पुलिस की गोली से मारे गए 7 शहीदों को बेतिया शहीद पार्क पर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा भवन बेतिया में एक सेमिनार का आयोजन किया गया.

मुख्य बिंदु 

  • शहीदों को श्रद्धांजलि: 1974 के छात्र आंदोलन में बेतिया में शहीद हुए 7 छात्रों को शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई।
  • सेमिनार का आयोजन: बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा भवन में सेमिनार हुआ, जिसमें छात्र आंदोलन के इतिहास और महत्व पर चर्चा की गई।
  • छात्रों पर गोलीबारी: 16 मार्च 1974 को पुलिस की गोलीबारी में 7 छात्रों की मौत हुई, जो महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
  • मुआवजे की मांग: शहीद छात्रों के परिवारों को आज तक मुआवजा नहीं मिला, जिसे लेकर सरकार से लगातार मांग की जा रही है।
  • मार्च और माल्यार्पण: सेमिनार के बाद शहीदों को सम्मान देने के लिए मार्च निकाला गया और शहीद स्मारक पर माल्यार्पण किया गया।

जिसे संबोधित करते हुए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के बिहार राज्य सचिवमंडल सदस्य प्रभुराज नारायण बताया कि 1974 में 16 मार्च को बेतिया के महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय से एस एफ आई की पश्चिम चम्पारण जिला कमिटी तत्कालीन जिला सचिव प्रभुराज नारायण राव के नेतृत्व में एक विशाल जुलूस निकाला गया।

जो राज देवढ़ी स्थित जिला पदाधिकारी पश्चिम चंपारण के समक्ष प्रदर्शन करने के लिए जा रहा था।लेकिन तत्कालीन एस पी की हठधर्मिता और छात्रों पर गोली चलाने के बाद छात्र उग्र हो गए और पुलिस की घेराबंदी को तोड़ कर आगे बढ़ने के बाद एस पी द्वारा गोली चार्ज का आदेश दिया गया।पुलिस द्वारा बर्बरता और निर्ममतापूर् गोलियां बरसाई गई।जिसमें 7 लोग मारे गए।

उन्होंने बताया कि छात्रों का यह प्रदर्शन महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा में आमूल परिवर्तन तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रहा था.

यह प्रदर्शन देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी प्रवृत्ति तथा बिहार में कांग्रेस नीत अब्दुल गफूर की सरकार की तानाशाही के खिलाफ हो रहा था। यह प्रदर्शन बिहार का पहला प्रदर्शन था जिस पर गोलियां चलाई गई और 7 छात्रों को मौत के घाट उतार दिया गया। 

यही कारण था कि यह आंदोलन बेतिया तक सीमित नहीं रहा ।बल्कि 18 मार्च को पटना में होने वाले छात्र प्रदर्शन का मुख्य मांग बन गया था। यह आंदोलन देखते देखते न केवल पूरे बिहार बल्कि देश के कोने कोने में फेल गया।

छात्र आंदोलन के बल पर पैदा हुई सरकारों ने अभी तक शहीद छात्रों के परिवारों को मुआवजा तक नहीं दिया। हम लोग इस लड़ाई को लड़ते हुए लगातार बिहार सरकार को ध्यान दिल रहे हैं.

लेकिन सरकार नहीं सुन रही है ।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी छात्र आंदोलन के उपज हैं आज मुख्यमंत्री बने हुए हैं लेकिन छात्र आंदोलन की शुरुआत करने वाले सरकार में बैठे नेता शहादत के जाम पीने वाले बेतिया के शहीद छात्रों के परिवार को मुआवजा नहीं दे रही है।  

इस अवसर पर ओमप्रकाश क्रांति, बबलू दुबे,केदार चौधरी,सी आई टी यू के जिला सचिव शंकर कुमार राव, नीरज बरनवाल, बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन के जिला सचिव प्रभुनाथ गुप्ता, अध्यक्ष प्रकाश वर्मा, भारत की जनवादी नौजवान सभा के जिला उपाध्यक्ष सुशील श्रीवास्तव ,पूर्व छात्र नेता नीरज बरनवाल ,मोहम्मद हनीफ आदि लोगों ने भी अपने विचारों को रखा।

उसके बाद शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने तथा उनके आश्रितों को मुआवजा देने की मांग करते हुए मार्च निकाला गया ।जो शहीद स्मारक पर जाकर शहीदों को माल्यार्पण किया।

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