20 लाख लोगों का उपचार बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में मौजूद 12 चिकित्सकों पर है निर्भर
बगहा। बगहा अनुमंडल क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ लाभ प्राप्त करने के लिए जन जागरूकता चलाने का अह्वान बगहा अनुमंडल पदाधिकारी डा. अनुपमा सिंह ने किया है। सोमवार की देर शाम मीडिया को अपने सभागार में बुलाकर उक्त सन्दर्भ में जानकारी दी हैं। मीडिया को सम्बोधन के दौरान कही हैं कि पिछले दिनों भैरोगंज की स्वास्थ विभाग के छापेमारी दौरान यह बात उभरकर आयी है कि ग्रामीण महिलाओं को झोला छाप डाक्टर बहला फुसलाकर गर्भाशय को अपव्यय बतलाकर आप्रेशन कर शरीर से बाहर निकाल दे रहें हैं, जबकि महिलाओं के शरीर में गर्भाशय का रहना अतिआवश्यक है।
कहा कि अनुमंडलीय अस्पताल बगहा या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकार के द्वारा चिकित्सा उपलब्ध है। लोगों को अपने इलाज के लिए इन अस्पतालों में जाकर अपनी डिमांड रखने की जरूरत है। इस दौरान कोई चिकित्सक मरीज को रेफर कर रहा है, या चिकित्सा करने से इन्कार कर रहा है, तो लोगों को चिकित्सक से पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही अन्यत्र जाय।
गौरतलब हो कि बगहा अनुमंडल क्षेत्र में आये दिन फर्जी क्लिनिकों में भोले भाले महिला मरीजों के गर्भाशय में थोड़ी बहुत समस्या की शिकायत रहने पर झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीज को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी बता कर पैसे की लालच में मानवता को ताक पर रख 30 से 35 वर्ष के कम उम्र में गर्भाशय की ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल दिया जा रहा है, ऐसे में मरीजों को जीवनभर कमर, पैर, सिर में दर्द की शिकायत झेलने की संभावना बनी रहती है, जबकि आधुनिक मेडिकल रिसर्च में गर्भाशय जैसे कोई भी समस्याओं का 90 प्रतिशत इलाज दवा से किया जा सकता है। सिर्फ 10 प्रतिशत मरीजों का ही जटिल होता है, जिसका ऑपरेशन से उनका इलाज किया जाता है।
वहीं दूसरी तरफ मरीजों के इलाज के लिए बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। नये डॉक्टरों की शिकायत है कि प्रतिवर्ष नियमित रूप से डॉक्टरों की बहाली नहीं हो रही है। दूसरी ओर, आइएमए का मानना है कि नियुक्ति की जटिल प्रक्रिया से आजिज होकर युवा डॉक्टर प्राइवेट सेक्टर की ओर चले जा रहे हैं।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में स्थायी चिकित्सकों के कुल 12895 पद स्वीकृत हैं। स्थायी चिकित्सकों के कुल पदों में 6330 पदों पर ही चिकित्सक कार्यरत हैं, अब भी 50 प्रतिशत स्थायी चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। इसी प्रकार से सरकारी अस्पतालों में संविदा वाले 4751 पद स्वीकृत हैं, जिस पर 3030 पदों पर चिकित्सक कार्यरत हैं।
संविदा वाले 36 प्रतिशत पद रिक्त हैं, ऐसे में पुरे बिहार में जितना चिकित्सकों का पद है, उसमें 50 प्रतिशत अब भी खाली है। भासा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक ओपीडी और इमरजेंसी चलाने के लिए बिहार में चिकित्सकों की कमी है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में 32 चिकित्सकों का पद है, जिसमें 16 की पोस्टिंग है। कार्यरत 12 हैं, 4ने अब तक ज्वायंन नहीं किया है।
बगहा क्षेत्र की जनसंख्या 2011 के जनगणना के मुताबिक 14 लाख है, जो बढ़कर तकरीबन 20 लाख से उपर हो गया है, ऐसे में 20 लाख लोगों का उपचार बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में मौजूद 12 चिकित्सकों पर निर्भर है। स्वास्थ्य विश्लेषकों की बात मानी जाय तो इतनी कम चिकित्सकों की संख्या में, इतनी बड़ी जनसंख्या का इलाज सम्भव नहीं है। बहरहाल बगहा अनुमंडल पदाधिकारी ने लोगों के स्वास्थ्य लाभ के लिए जन जागरूकता अभियान छेड़ रखा है।
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